हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
जिले की सबसे पुरानी और क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी तहसील धरमजयगढ़ का बस स्टैंड आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। कभी क्षेत्र की पहचान माने जाने वाले इस बस स्टैंड की वर्तमान स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। यह बात प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाजसेवी रमेश चैनानी ने कही।
श्री चैनानी ने कहा कि धरमजयगढ़ बस स्टैंड अंचल के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री, ग्राहक और वाहन पहुंचते हैं। बसों की लगातार आवाजाही और बाजार क्षेत्र होने के कारण यहां हर समय भीड़ बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है।
उन्होंने बताया कि बस स्टैंड में न तो समुचित यात्री प्रतीक्षालय की व्यवस्था है और न ही यात्रियों के लिए पर्याप्त पेयजल सुविधा उपलब्ध है। बैठने की व्यवस्था भी लगभग नदारद है, जिससे यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वहीं बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थित यातायात के कारण आवागमन भी दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।व्यापारी संघ के पूर्व सचिव रहे रमेश चैनानी ने आत्ममंथन करते हुए कहा कि बस स्टैंड की इस स्थिति के लिए कुछ हद तक व्यापारी वर्ग भी जिम्मेदार है, क्योंकि समय के साथ सभी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में व्यस्त हो गए और इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से मिलकर बस स्टैंड के विकास के लिए पहल करने की अपील की है। श्री चैनानी ने मांग की है कि नगर सरकार के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विधायक और सांसद की संयुक्त बैठक बुलाकर बस स्टैंड को सुसज्जित, सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन उचित दिशा-निर्देश और योजना के साथ आगे बढ़ता है तो धरमजयगढ़ का व्यापारी वर्ग भी बस स्टैंड के विकास और सौंदर्यीकरण में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
“धरमजयगढ़ की पहचान बना बस स्टैंड अब विकास की राह देख रहा है, ऐसे में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को मिलकर इसकी बदहाली दूर करने के लिए गंभीर पहल करनी होगी।”











