बिना सहमति प्रतिनियुक्ति पर भेजना पड़ा भारी, हाई कोर्ट ने कहा—नियमों की अनदेखी नहीं कर सकता शासन

हिन्दी समाचार : रायगढ़/धरमजयगढ़
धरमजयगढ़ के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) सिद्धांत तिवारी की EOW-ACB, रायपुर में प्रतिनियुक्ति का आदेश हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी सहमति लिया जाना आवश्यक है।
गौरतलब है कि गृह पुलिस विभाग ने 13 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर सिद्धांत तिवारी की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेते हुए उन्हें EOW-ACB, रायपुर में पदस्थ किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
तबादला नहीं, प्रतिनियुक्ति का था मामला
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि संबंधित आदेश सामान्य स्थानांतरण का नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति का आदेश है। प्रतिनियुक्ति के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई, जो सेवा कानून में स्थापित प्रक्रिया के विपरीत है।
फैसले से साफ संदेश—प्रतिनियुक्ति में प्रक्रिया जरूरी
हाई कोर्ट के इस आदेश को सेवा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक आवश्यकता अपनी जगह है, लेकिन प्रतिनियुक्ति के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और कर्मचारी की सहमति के नियमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
वहीं राज्य शासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि EOW-ACB में लंबित जांचों को जल्द पूरा करने के लिए अतिरिक्त अधिकारियों की आवश्यकता है। शासन ने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चल रही कार्यवाही का हवाला देते हुए जांचों को शीघ्र पूरा करने के प्रयासों की जानकारी भी दी।
राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ मूलभूत नियमों के नियम 110 के तहत सक्षम अधिकारी को सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली संस्था में कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना भी स्थानांतरित करने का अधिकार है।
हाई कोर्ट ने कहा—प्रशासनिक जरूरत से नियम खत्म नहीं होते
रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि शासन के आदेश में सिद्धांत तिवारी की सेवाएं स्पष्ट रूप से प्रतिनियुक्ति पर लेने का उल्लेख किया गया था, लेकिन इसके लिए उनकी सहमति नहीं ली गई।अदालत ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता या किसी सरकारी परिपत्र का हवाला देकर प्रतिनियुक्ति से जुड़े स्थापित नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सिद्धांत तिवारी की प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि अदालत ने शासन को नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए नया आदेश जारी करने की स्वतंत्रता दी है।














