हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़

नगर पंचायत धरमजयगढ़ में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर के पुलिस थाना के मुख्य द्वार के सामने अवैध रूप से ठेला लगाकर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि उक्त ठेला पहले थाना के मुख्य द्वार के ठीक बगल में लगाया गया था। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद ठेला हटाने के बजाय उसे कुछ कदम आगे खिसकाकर दोबारा उसी क्षेत्र में कब्जा कर लिया गया।
हालांकि, अध्यक्ष और नगर पंचायत प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक रूप से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह जरूरी है कि नगर पंचायत प्रशासन स्पष्ट करे कि क्या उक्त ठेले को लगाने की अनुमति दी गई है? यदि नहीं, तो नोटिस के बाद भी कब्जा क्यों कायम है?अब देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन वास्तव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है या फिर नोटिस और कार्रवाई का खेल इसी तरह चलता रहेगा।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा है कि आखिर नगर पंचायत का नोटिस सिर्फ जगह बदलने के लिए था या अतिक्रमण हटाने के लिए? यदि नोटिस के बाद भी उसी स्थान के आसपास ठेला लगाकर सार्वजनिक जगह पर कब्जा जारी है तो नगर पंचायत प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नोटिस के बाद भी कब्जा बरकरार, सिर्फ जगह बदली !
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है। पहले थाना के मुख्य द्वार के समीप ठेला लगाया गया, जिस पर नगर पंचायत ने नोटिस दिया। लेकिन इसके बाद ठेले को हटाने के बजाय कुछ दूरी आगे कर दिया गया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या नगर पंचायत प्रशासन ने अतिक्रमण हटाया या केवल अतिक्रमण की लोकेशन बदलवा दी?
अध्यक्ष और प्रशासन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सार्वजनिक स्थान पर अवैध कब्जे के खिलाफ वास्तव में कार्रवाई हो रही है तो नोटिस के बाद ठेला पूरी तरह हटना चाहिए था। इसके बावजूद उसी क्षेत्र में ठेला संचालित होना कहीं न कहीं कथित संरक्षण अथवा मिलीभगत की आशंका को जन्म देता है।














