हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़

सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दावे अक्सर किए जाते हैं, लेकिन धरमजयगढ़ में सामने आई एक तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्राम पंचायत कामोसिनडांड के आश्रित ग्राम निवासी दिव्यांग युवक उचित राम अपनी दिव्यांग पेंशन लेने दूर-दराज से धरमजयगढ़ पहुंचा, लेकिन उसके हाथ में कोई सहायक उपकरण नहीं था—वह एक लकड़ी के सहारे चलने को मजबूर नजर आया।
भारतीय स्टेट बैंक में दिव्यांग पेंशन लेने पहुंचे उचित राम पर स्थानीय पत्रकारों की नजर पड़ी। जनपद पंचायत के सामने जब उससे बातचीत की गई तो उसने अपनी जिंदगी की ऐसी पीड़ा बताई, जो सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।
लाठी बनी सहारा,ट्राइसिकल के लिए अब तक इंतजार
उचित राम ने बताया कि वह दिव्यांग है और चलने-फिरने में काफी परेशानी होती है। इसके बावजूद उसे शासन की ओर से अब तक ट्राइसिकल नहीं मिल सकी है। उसका कहना है कि वह कई बार आयोजित शिविरों में जाकर अपनी समस्या बता चुका है और ट्राइसिकल के लिए आवेदन/मांग कर चुका है, लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दूर-दराज के गांव से पेंशन लेने धरमजयगढ़ तक लाठी के सहारे पहुंचने को मजबूर उचित राम की तस्वीर व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल छोड़ रही है : जब जरूरतमंद व्यक्ति खुद चलकर सरकारी दफ्तरों और शिविरों तक पहुंच रहा है, तो क्या शासन की योजनाएं भी उसके घर तक नहीं पहुंच सकतीं ?
उसकी स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लंबी दूरी तय कर पेंशन लेने धरमजयगढ़ आने के लिए उसे लकड़ी की लाठी का सहारा लेना पड़ता है। तस्वीर में भी वह इसी लकड़ी के सहारे खड़ा दिखाई दे रहा है।
भाई को मिली ट्राइसिकल, लेकिन उचित राम अब भी वंचित
उचित राम ने बताया कि उसके परिवार में उसका भाई भी दिव्यांग है और उसकी पत्नी भी दिव्यांग है। उसके भाई को ट्राइसिकल मिल चुकी है, लेकिन वह स्वयं अब तक इस सुविधा से वंचित है। उसका कहना है कि वह लगातार शिविरों और संबंधित स्थानों पर अपनी समस्या लेकर जाता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो पाई।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब एक ही परिवार में दिव्यांग सदस्यों की स्थिति शासन-प्रशासन के संज्ञान में है, तो फिर जरूरतमंद उचित राम तक सहायक उपकरण क्यों नहीं पहुंच पाया?
आवास योजना का लाभ भी नहीं मिला
उचित राम ने यह भी बताया कि उसे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित आवास सुविधा का लाभ भी अब तक नहीं मिला है। आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होने के बावजूद पक्के आवास का लाभ नहीं मिलने से उसके सामने जीवनयापन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
यह स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है, जब सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ही दिव्यांग, गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
प्रशासन तक पहुंचे उचित राम की आवाज
उचित राम की कहानी महज एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि उन सवालों को सामने लाती है जो योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचने को लेकर उठते हैं। क्या संबंधित विभाग ने उचित राम के आवेदन और उसकी पात्रता की जांच की? यदि वह पात्र है तो अब तक ट्राइसिकल क्यों नहीं मिली? आवास योजना से उसका नाम क्यों जुड़ नहीं पाया?
स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को मामले का संज्ञान लेकर उचित राम की स्थिति की जांच करनी चाहिए तथा यदि वह पात्र है तो ट्राइसिकल, आवास और अन्य पात्र शासकीय योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिलाने की पहल करनी चाहिए।













