हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम पुरुंगा में मेसर्स अंबुजा सीमेंट (अडाणी समूह) की प्रस्तावित परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। क्षेत्र में चर्चा है कि कंपनी आने वाले दिनों में प्रस्तावित परियोजना की जनसुनवाई कराने की तैयारी में जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की कवायद चल रही है।
इसी बीच धरमजयगढ़ विकासखंड के तेन्दुमुड़ी गांव में अदाणी फाउंडेशन द्वारा एक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया, जिसमें कंपनी के अनुसार 43 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 17 पुरुष और 26 महिलाएं शामिल थीं।
हालांकि इस स्वास्थ्य शिविर को लेकर अब ग्रामीणों के बीच विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। कुछ ग्रामीणों ने हमारी टीम से चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि प्रस्तावित परियोजना की जनसुनवाई से पहले कंपनी गांवों में स्वास्थ्य शिविर और अन्य सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं का वे विरोध नहीं करते, लेकिन यदि इन गतिविधियों का उद्देश्य जनसुनवाई को प्रभावित करना है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
कंपनी का पक्ष : अदाणी फाउंडेशन का कहना है कि वह विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और सामुदायिक विकास के तहत सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की गतिविधियां संचालित करता है। तेन्दुमुड़ी में आयोजित स्वास्थ्य शिविर भी इसी सामाजिक पहल का हिस्सा बताया जा रहा है। कंपनी की ओर से इस शिविर को जनसुनवाई या प्रस्तावित परियोजना से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वहीं क्षेत्र में एक और सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि गांव में आयोजित इस तरह के स्वास्थ्य शिविर के लिए क्या स्वास्थ्य विभाग अथवा सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि किसी संस्था द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाता है तो संबंधित विभागों की जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। हालांकि इस संबंध में अभी तक स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी बरकरार
प्रस्तावित परियोजना को लेकर पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी लगातार उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि परियोजना शुरू होती है तो क्षेत्र में
खनन और औद्योगिक गतिविधियों से वन क्षेत्र एवं जैव विविधता पर असर पड़ सकता है।
💢धूल और वायु प्रदूषण बढ़ने से आसपास के गांवों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
💢भूजल स्तर और जल स्रोतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
💢भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क सुरक्षा, ध्वनि प्रदूषण और ग्रामीण जीवन प्रभावित हो सकता है।
💢 कृषि भूमि और स्थानीय आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका ग्रामीण व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि किसी भी परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिलने से पहले इन संभावित प्रभावों का आकलन पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) और जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है।











