हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
धरमजयगढ़ क्षेत्र में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण दूसरे राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में मछली से भरे वाहन क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता, वैध दस्तावेजों और परिवहन नियमों की प्रभावी जांच नहीं की जा रही है.इसके अलावा क्षेत्र में प्रतिबंधित मछली बीज की भी खपत जोरो पर चल रही है
स्थानीय मछुआरों का कहना है कि बाहरी राज्यों से आने वाली मछलियों की वजह से उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इससे स्थानीय मत्स्य पालन व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और मछुआरों की आय पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आ रही है कि पश्चिम बंगाल से आने वाली कुछ मछली गाड़ियों से कथित रूप से अवैध वसूली की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। यदि इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना आवश्यक है।
लोगों का यह भी कहना है कि यदि नियमित जांच अभियान चलाया जाए तो यह पता लगाया जा सकता है कि मछली का परिवहन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं तथा खाद्य सुरक्षा और मत्स्य विभाग के नियमों का पालन किया जा रहा है। लगातार वाहनों की आवाजाही के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या निगरानी दिखाई नहीं दे रही, जिससे विभाग की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मत्स्य विभाग को सक्रिय करते हुए पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों से आने वाली मछली गाड़ियों की नियमित जांच कराई जाए। साथ ही परिवहन से संबंधित दस्तावेज, गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों की भी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय मछुआरों के हितों का भी संरक्षण हो सके।











