🫵 KPCL की प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में उमड़ा जनसैलाब, लेकिन अनुमति को लेकर खड़ा हुआ नया विवाद
हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) की प्रस्तावित 1610.75 हेक्टेयर कोयला खदान परियोजना के विरोध में गुरुवार को धरमजयगढ़ क्षेत्र में ग्रामीणों, किसानों और आदिवासी समुदाय का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में लोग रैली और विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए तथा प्रस्तावित खदान परियोजना के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित खनन परियोजना से क्षेत्र के जंगल, जल, जमीन और आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। ग्राम पंचायत बायसी कॉलोनी की ग्राम सभा ने भी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र भेजकर प्रस्तावित कोल ब्लॉक को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्राम सभा का कहना है कि पेसा अधिनियम, वनाधिकार कानून, संविधान की पांचवीं अनुसूची तथा स्थानीय समुदायों के अधिकारों की अनदेखी कर किसी भी परियोजना को लागू नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने दावा किया कि ग्राम सभा पहले ही सर्वसम्मति से इस परियोजना का विरोध कर चुकी है।
आंदोलन के बीच बड़ा खुलासा : रैली और विरोध प्रदर्शन की नहीं ली गई थी अनुमति
इसी बीच इस पूरे आंदोलन को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, रैली और विरोध प्रदर्शन के लिए एसडीएम कार्यालय धरमजयगढ़ से किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी।इस संबंध में जब स्थानीय मीडिया हिन्दी समाचार ने एसडीएम धरमजयगढ़ से चर्चा की तो उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में तमनार क्षेत्र में हुए विवाद के बाद रायगढ़ जिले में रैली, विरोध अथवा धरना-प्रदर्शन और बड़े सार्वजनिक आंदोलनों की अनुमति प्रक्रिया को और अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है।एसडीएम ने कहा कि प्रशासन द्वारा निर्धारित नई प्रक्रिया का पालन करना सभी संगठनों और आंदोलनकारियों के लिए अनिवार्य है। बिना अनुमति किसी भी प्रकार की रैली, धरना या प्रदर्शन किए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
परियोजना पर विरोध जारी, प्रशासन भी सतर्क
एक ओर जहां ग्रामीण और आदिवासी समुदाय कोल खदान परियोजना के विरोध में लामबंद नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
क्या है नियम…?
स्थानीय मीडिया से बातचीत के दौरान एसडीएम धर्मजयगढ़ ने बताया कि तमनार में हुई घटना के बाद प्रशाशन किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती इसलिए रायगढ़ जिले में किसी विरोध प्रदर्शन अथवा आंदोलन के लिए एसडीएम कार्यालय से एक आवेदन का प्रारूप भरना होता है जिसके बाद यह आवेदन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को देकर अनुमति मांगी जाती है तत्पश्चात् इस आवेदन को धर्मजयगढ़ एसडीओपी कार्यालय भेजा जाता है जहां सबकुछ जांच परखने के बाद अनुमति के लिए वापस एसडीएम कार्यालय भेजा जाता है आवेदन के प्रारूप में सब कुछ ठीकठाक रहा तो अनुमति दी जाती।









