हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
नगर के दशहरा मैदान में संचालित मीनाबाजार के बाहर अपनी रोजी-रोटी के लिए दुकान लगाने वाले गरीब दुकानदारों से प्रतिदिन ₹100 की वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह राशि नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था के नाम पर ली जा रही है, तो क्या इसकी कोई रसीद दी जा रही है या फिर सब गोलमाल है ?
मामले में जब मीनाबाजार के संचालक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “कभी-कभी दुकानदार पैसा देते हैं और यह राशि साफ-सफाई के लिए ली जाती है। नगर पंचायत के सफाईकर्मियों को दो दिन की सफाई के लिए लगभग ₹500 दिए जाते हैं।”
वहीं, मीनाबाजार के बाहर दुकान लगाने वाले एक दुकानदार ने दावा किया कि हर दुकानदार से ₹100 लिए जाते हैं, लेकिन इसकी कोई रसीद नहीं दी जाती। दुकानदारों का कहना है कि मीनाबाजार के बाहर बैठे छोटे व्यापारियों से इस तरह वसूली करना पूरी तरह अनुचित और अवैध प्रतीत होता है।
अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं —
- यदि नगर पंचायत सफाई शुल्क ले रही है तो उसकी अधिकृत रसीद क्यों नहीं दी जा रही?
- क्या नगर पंचायत ने इस तरह शुल्क वसूलने की कोई लिखित अनुमति जारी की है?
- मीनाबाजार के संचालक को बाहरी दुकानदारों से पैसा लेने का अधिकार किसने दिया?
- गरीब दुकानदारों से प्रतिदिन नकद वसूली का हिसाब-किताब आखिर कहां दर्ज होता है?
गरीब और छोटे दुकानदारों का कहना है कि वे रोज कमाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में बिना रसीद और बिना स्पष्ट नियम के प्रतिदिन ₹100 की वसूली उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है।
अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में नगर पंचायत धरमजयगढ़ और संबंधित प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, या फिर गरीब दुकानदारों से होने वाली यह कथित वसूली यूं ही जारी रहेगी।

(नोट: यह समाचार संबंधित पक्षों के बयानों और दुकानदारों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। यदि नगर पंचायत या मीनाबाजार प्रबंधन का विस्तृत पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)











