📰 हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना में निर्माणाधीन 8 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। शुरुआत से ही चर्चाओं में रही इस परियोजना पर अब वन अधिनियमों के खुले उल्लंघन और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित पावर कंपनी द्वारा वन मंडल क्षेत्र में बिना विधिवत गैर-वानिकी अनुमति लिए ही अवैध रूप से निर्माण कार्य कर स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है। इतना ही नहीं, शासकीय खसरा नंबर 365 में भी निर्माण कार्य पूरा होने की बात सामने आ रही है।ताजा मामला बाकारुमा परिक्षेत्र के अंतर्गत चरखापारा से भालूपखना तक बिछाई जा रही विद्युत लाइन से जुड़ा है।
बताया जा रहा है कि जंगल के भीतर बिजली के खंभे गाड़े जा रहे हैं, जिसमें वन अधिनियमों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, विद्युत विभाग ने लाइन विस्तार के लिए अनुमति ली है, लेकिन संबंधित अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कार्य धनबादा पावर कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। इस परियोजना के तहत 13 मीटर ऊंचे खंभों पर 8 मीटर तक 11 केवी और उसके ऊपर 33 केवी की लाइन बिछाई जा रही है।जब इस मामले में वनमंडल अधिकारी, धरमजयगढ़ से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें विद्युत विभाग के आवेदन के आधार पर स्वीकृति दी गई है। वहीं, विद्युत विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्य उनके माध्यम से नहीं, बल्कि धनबादा पावर द्वारा कराया जा रहा है।
💢 अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ?
👉 क्या इस कार्य के लिए शासन स्तर से कोई राशि स्वीकृत की गई है?
👉 क्या विद्युत विभाग ने ठेकेदार को विधिवत वर्क ऑर्डर जारी किया है ?
👉 यदि नहीं, तो वन विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई ?
गौरतलब है कि इस विद्युत लाइन को लेकर पहले भी आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। मुरली साहू द्वारा आवेदन देकर कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कार्य जारी है।
⚡ ऐसे में सवाल उठता है कि ?
क्या पावर कंपनी के प्रभाव के आगे प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक हो चुका है? स्वीकृति की आड़ में जिस तरह वन कानूनों की अनदेखी की जा रही है, वह पूरे मामले में बड़े स्तर पर मिलीभगत और संरक्षण की ओर इशारा करता है।
👉 अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करते हैं या फिर पावर कंपनी को खुली छूट मिलती रहेगी।








