हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
नगर पंचायत धरमजयगढ़ एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं और कथित घोटाले को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये के गबन का सामने आया है। आरोप है कि शासन द्वारा नगर में स्ट्रीट लाइट स्थापना के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से इस राशि का दुरुपयोग किया गया।
जानकारी के अनुसार, टेंडर शर्तों के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया। जहां पूरे नगर में 260 स्ट्रीट लाइट लगाई जानी थी, वहीं वास्तविकता में इससे कम लाइटें लगाई गईं, जबकि ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, निर्धारित मानकों की भी अनदेखी की गई—10 मीटर के पोल की जगह 7 मीटर के पोल लगाए गए और घटिया गुणवत्ता की लाइटें लगाई गईं, जो एक माह के भीतर ही खराब हो गईं।
टेंडर के अनुसार एक पोल की कीमत 26 हजार से लेकर 29,600 रुपये तक निर्धारित थी। ऐसे में कम सामग्री और निम्न गुणवत्ता के बावजूद पूर्ण भुगतान किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
👉 जांच हुई तो खुलेंगे बड़े राज?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई अधिकारी-कर्मचारी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। नगर पंचायत में हुए इस कथित घोटाले ने शासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
📣जनता परेशान, जिम्मेदार मौन
इस घोटाले का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच कई वार्डों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ रहे हैं।
⚡राजनीति सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित?
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जनप्रतिनिधि केवल सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
🔥मांग उठी—हो उच्च स्तरीय जांच
नगरवासियों ने मांग की है कि नगर पंचायत के सभी निर्माण कार्यों और खरीदी से जुड़े बिल-वाउचर की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके और भविष्य में इस तरह के घोटालों पर रोक लगाई जा सके।








