हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
मांड नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मलका जल विद्युत परियोजना से क्षेत्रवासियों को आज तक कोई ठोस लाभ नहीं मिल पाया है। हालात यह हैं कि बिजली संकट जस का तस बना हुआ है, जबकि परियोजना से उम्मीद थी कि स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति में सुधार होगा।
कंपनी का तर्क है कि नदी में पानी होने पर ही बिजली उत्पादन संभव है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब नदी में पर्याप्त पानी था, तब भी क्या धरमजयगढ़ को इस परियोजना से बिजली मिली ? स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्षों से बिजली समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🔍 निर्माण कार्य पर उठे सवाल ?
परियोजना के निर्माण में भारी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। नदी से पॉवर हाउस तक पानी लाने के लिए बनाई गई नहर को लेकर लोगों का कहना है कि इसका निर्माण बेहद घटिया स्तर का है। उद्घाटन के समय भी नहर अधूरी थी और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उद्घाटन के दिन ही प्लांट की मशीनें चालू नहीं हो पाईं। इससे पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
🚱 जल आवर्धन योजना पर पड़ा असर
मलका परियोजना के कारण नगर पंचायत की जल आवर्धन योजना भी प्रभावित होती नजर आ रही है। आरोप है कि परियोजना के लिए नदी का पानी रोके जाने से जल आवर्धन योजना तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे भीषण गर्मी में नगरवासियों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।
⚠️ जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कथित कमीशनखोरी के चलते बिना दूरदर्शिता के इस परियोजना को अनापत्ति दे दी। जबकि जल आवर्धन योजना पहले से संचालित थी, उसके बावजूद बाद में आए इस प्रोजेक्ट को अनुमति देना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।
📢 जनता पूछ रही—किसका विकास ?
आज स्थिति यह है कि करोड़ों की परियोजना से न तो बिजली मिल रही है और न ही पानी की समस्या का समाधान हो पा रहा है। उल्टा, नगरवासियों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस परियोजना का असली फायदा किसे मिल रहा है : जनता को या सिर्फ कागजों में विकास दिखाने वालों को ?









