हिन्दी समाचार : धरमजयगढ़
धरमजयगढ़ क्षेत्र के नेवार गांव के जंगलों में अतिक्रमण का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। जंगल की जमीन पर खुलेआम जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से पेड़ों की कटाई कर खेत तैयार किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभाग ही एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं।
मामले में नया मोड़ तब आया जब वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित भूमि “राजस्व जमीन” है। यानी वन विभाग इस पर अपनी जिम्मेदारी मानने से बच रहा है, जबकि मौके पर साफ तौर पर जंगल क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और जमीन समतलीकरण जारी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह क्षेत्र वन क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब अचानक इसे राजस्व जमीन बताकर अतिक्रमण को खुली छूट दी जा रही है।
इससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।इतना ही नहीं, अतिक्रमण के साथ-साथ अवैध बोर खनन का मामला भी सामने आया है। बिना अनुमति के किए जा रहे बोर से भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि जमीन वन की है या राजस्व की, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
👉 बड़ा सवाल : जंगल उजड़ते रहे और विभाग जिम्मेदारी से बचते रहे — आखिर किसके भरोसे बचेगा नेवार का जंगल? 🌳








