हिंदी समाचार – धरमजयगढ़
ठेकेदार श्रम कानून की उड़ा रहे धज्जियां, छोटे-छोटे बच्चों से करवाया जा रहा मजदूरी देखने वाला कोई नहीं
रायगढ़ जिले में अगर देखा जाए तो सबसे अधिक भ्रष्टाचार धरमजयगढ़ विकास खण्ड में ही देखा जा सकता है? धरमजयगढ़ विकास खण्ड में भ्रष्टाचारियों पर स्थानीय प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं करते हैं जिसके कारण इनके हौसला बुलंद हो गया है। यहां हर विभाग में खुलकर भ्रष्टाचार देखने को मिलता है। आज हम बात करने जा रहे हैं धरमजयगढ़ मुख्यालय में आदिम जाति विभाग द्वारा करोड़ों खर्चकर एक हॉस्टल भवन का निर्माण करवाया जा रहा है। इस भवन निर्माण में ठेकेदार द्वारा मनमाने तरीके से निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करने वाला निर्माण स्थल पर कोई नहीं रहता है जिसके कारण ठेकेदार मनमाने तरीके से निर्माण कार्य को अंजाम दे रहा है, निर्माण स्थल पर जाकर देखने पर निर्माण कार्य में कई अनियमितता देखने को मिलता रहा है लेकिन विडंबना है कि आदिम जाति विभाग के कोई भी अधिकारी या फिर कोई इंजीनियर निर्माण कार्य को देखने नहीं आते हैं, हॉस्टल भवन का ढलाई जब हो रहा था तब विभाग का कोई भी इंजीनियर कार्य स्थल पर नहीं थे और ठेकेदार मनमाने तरीके से ढलाई का काम को अंजाम दिया है, तो वहीं ठेकेदार द्वारा छोटे-छोटे बच्चों से ढलाई का कार्य करवाया जा रहा था। स्थानीय प्रशासन को चाहिए की करोड़ों रूपये निर्माण हो रहे भवन का उचित जांच कर गुणवत्ता के साथ निर्माण करवाया।अधिकारियों की आंखों के सामने बाल श्रम कानून कर उड़ा रही धज्जियांनगर में करोड़ों रूपये से बन रहे भवन में बाल श्रमकानून की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही है, छोटे-छोटे बच्चों से भारी-भारी काम करवाया जा रहा है जो बाल श्रमिक कानून का उल्लंघन है, निर्माण स्थल पर जिस प्रकार से बाल मजदूरों से कार्य करवाया जा रहा है उससे तो साफ हो रहा है कि निर्माण स्थल पर कोई भी अधिकारी-कर्मचारी देखने तक नहीं जाते हैं अगर अधिकारी निर्माण कार्य की जायजा लेने जाते तो शायद इन छोटे-छोटे बच्चों से निर्माण कार्य में काम नहीं लेते।निर्माण कार्य में हो रहा खुलकर भ्रष्टाचार?निर्माण स्थल पर निर्माण कार्य की देख रेख करने वाला कोई नहीं होने के कारण निर्माण कार्य भी घटिया हो रहा है इनके द्वारा कालम का जो निर्माण हो रहा है उसमें खुलकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है, ठेकेदार द्वारा, ग्राउंड फ्लोर कालम में 16 एमएम का छड़ लगाया गया है तो वहीं उपरी मंजिल में 12 एमएम का छड़ लगाया जा रहा है अब सोचने वाली बात है कि क्या इंजीनियर ऐसा एस्टीमेंट बनाया होगा? लोगों का मानना है कि ऐसा कोई भी निर्माण कार्य में नहीं होता है कि आधा में कुछ और मेटेरियल लगाया जाए और आधा में और कुछ, भवन निर्माण की जान कालम और बीम को माना जाता है तो फिर ऐसा कैसा हो सकता है यह जांच का विषय है।











